Description
Dr. Sanjeev Kumar
तारा
यह तय है कि डा. संजीव कुमार की यह पुस्तक ‘तारा’ निश्चित ही एक विशिष्ट दृष्टिकोण से रचित है। यह कृति महाकाव्य एक ऐसा काव्यात्मक आख्यान है, जिसमें वर्णित कथा बाह्य संघर्ष से शुरू होती है और आखिर में अंतरात्मा के संघर्ष में बदलती है। विभिन्न सर्गों में विभक्त यह कथा कड़ी-दर-कड़ी एक अलग तरह की रोचकता लिए आगे बढ़ती है, जो सभी वर्ग के पाठकों के लिए एक कौतुक का विषय बना रहेगा।
पुस्तक सिर्फ एक कथा नहीं, बल्कि यह सत्ता, धर्म तथा मनुष्य के संबंधों पर आधारित एक महत्त्वपूर्ण दार्शनिक महाकाव्य बन गया है, जो हर युग के पाठकों से एक तरह से विशिष्ट संवाद करती है।







