Description
Anil Goel
अनिल गोयल का जन्म 22 जून 1958 को हरियाणा में अम्बाला जिले के नारायणगढ़ में हुआ बचपन से ही दिल्ली में रहे। 18 वर्ष की आयु में ही पत्रकारिता से जुड़ गये। हिन्दुस्तान दैनिक जागरण राष्ट्रीय सहारा आउटलुक (हिन्दी) इत्यादि में स्वतन्त्र लेखन। समकालीन भारतीय साहित्य कादम्बिनी नया ज्ञानोदय इत्यादि में लगातार समीक्षात्मक लेखन। हिन्दुस्तान टाइम्स दी हिन्दू और देहली सिटी लिमिट्स इत्यादि में अंग्रेजी में भी कुछ लेखन कलाओं पर विशेष लेखन राष्ट्रीय स्तर पर नाट्यालोचक के रूप में प्रतिष्ठित । रंगमंच के इतिहासकार के रूप में दिल्ली के उन्नीसवीं शताब्दी के रंगमंच के इतिहास पर विशिष्ट शोध। राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय की त्रैमासिक पत्रिका श्रंग प्रसंग के अतिथि सम्पादक रहे। रंग प्रसंग छायानट संगना नटरंग कला वसुधा इत्यादि में लगातार लेखन। श्रेष्ठ थिएटर क्रिटिक के रूप में सम्मानित राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय की चयन समितियों तथा साहित्य कला परिषद् दिल्ली की मूल्यांकन समिति इत्यादि के सदस्य। दो फिल्मों की स्क्रिप्ट के लेखन से जुड़े रहे।1998 में श्म्यूजियम्स एंड कलैक्शंस ऑफ देहली ;(अंग्रेजी) 2001 में राष्ट्रीय पुस्तक न्यास (नेशनल बुक ट्रस्ट) के लिये सरकारी सेवाओं का उपयोग पुस्तिका का लेखन। उपन्यास कहीं खुलता कोई झरोखा और नया सवेरा कुछ कहानियाँ और कविताएँ प्रकाशित। एक उपन्यास सावन लेखन की प्रक्रिया में। इंडियन एयरलाइंस और बाद में एयर इंडिया में कार्यरत रहे।
नाटक एक थी लड़की उर्फ वे कुछ पल मूलतः एक प्रेमकथा है जिस के ऊपरी सपाट नजर आते धरातल के नीचे राजनीति की हल्की सी धारा भी बहती है! हृदयस्पर्शी नेहाख्यान के साथ.साथ ही इतिहास के भी मध्य से गुजरते हुए यह नाटक एक मर्मस्पर्शी कहानी पाठकों के सामने प्रस्तुत करता हु। 1975 में लगाये गये आपातकाल ने नायक और नायिका के सम्बन्धों को बहुत ही अकल्पनीय तरीके से प्रभावित किया। बाद में आकर किस प्रकार से इस नाटक के नायक की डायरी दो और जीवनों को प्रभावित करती है वही प्रसंग कथा को आगे बढ़ा कर इस नाटक को वर्तमान तक लेकर आता है। डायरी.लेखन की विधा के माध्यम से बहुत ही नाटकीय तरीके से लेखक ने इसकी कथा को आगे बढ़ाया है! हिन्दी में आपातकाल की काली अंधेरी रातों की पृष्ठभूमि में शायद ही किसी प्रेमकथा का लेखन हुआ होगा! यह नाटक अनिल गोयल की कहानी एक थी लड़की उर्फ वे कुछ पल का उन्हीं के द्वारा स्वयं किया गया नाट्य.रूपान्तरण है।






