Description
Dr. Madhukant
झगड़ूमल का पंगा पुराण
डॉ. मधुकांत की यह किताब एक ऐसा व्यंग्य संग्रह है जो समाज में सहज ही बिखरे पड़े विषयों, पात्रों या घटनाओं को अपने चुटीले अंदाज में अपनी ओर बुला रहा है। जैसा कि मुख्य शीर्षक से भी झलकता है कि इस व्यंग्य संग्रह का मुख्य पात्र झगड़ूमल है। वह झगड़ूमल कोई अलग नहीं, बल्कि हमारे भीतर कहीं बैठा ऐसा इन्सान है, जो यूं ही चुप नहीं रह पाता। यह व्यंग्य-संग्रह पुस्तक सिर्फ हंसाती नहीं, बल्कि पर्दे के पीछे कुछ ढंकी बातों-चीजों को अपने रोचक और सहज अंदाज में सामने लाती है। निश्चित ही यह व्यंग्य-संग्रह उन सभी पाठकों, जो विसंगतियों पर हंसना जानते हैं, को आसानी से हंसाने का दम रखता है।







