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Syahi Ke Us Paar

SKU: 9788169624794

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Description

Dr. Anuj Prabhat

नयिका गुल की यात्रा केवल घर लौटने की यात्रा नहीं है| वह अपने अस्तित्व अपने आत्मसम्मान अपने निर्णय और अपनी पहचान को पुनः प्राप्त करने की यात्रा है। एक समय उससे बिना पढ़े हस्ताक्षर करवा लिए जाते हैं और अंततः वही अपने सत्य को पढ़कर स्वयं अपने हस्ताक्षर करती है। इस उपन्यास का सबसे महत्त्वपूर्ण बिंदु है ,मनुष्य के अधिकार और उसकी अस्मिता का पुनर्स्थापन।

उपन्यास का शीर्षक “स्याही के उस” पार भी इसी भावभूमि से जन्मा है। स्याही केवल शब्द नहीं लिखती, वह समय और सत्य को भी दर्ज करती है। कभी वही स्याही छल के दस्तावेज़ों पर उतरती है, कभी डायरी के पन्नों पर मनुष्य की साँसों को बचाए रखती है, और कभी न्याय की दिशा में बढ़ाए गए पहले हस्ताक्षर को साक्षी बन जाती है। प्रश्न यह नहीं कि स्याही क्या लिखती है, प्रश्न यह है कि कलम कसके हाथ में है। शायद “स्याही के उस पार” वही स्थान है , जहा मनुष्य अपने जीवन की गाथा एक बार फिर स्वयं लिखना आरम्भ करता है |

Additional information

Weight .03 kg
Dimensions 24 × 14 × 2 cm