Description
Harisuman Bisht
‘सुनता है कोई’ समकालीन भारतीय नाटककार हरिसुमन बिष्ट द्वारा लिखित एक अत्यंत प्रभावशाली और यथार्थवादी नाटक है। यह नाटक आधुनिक लोकतांत्रिक भारत के उस स्याह चेहरे को उजागर करता है, जहाँ आजादी के दशकों बाद भी आम नागरिक अपने बुनियादी अधिकारों और पहचान के दस्तावेजों के लिए सरकारी तंत्र के सामने घुटने टेकने पर मजबूर है। यह केवल एक कार्यालय की कहानी नहीं है, बल्कि यह हर उस आम इंसान की चीख है जो व्यवस्था की संवेदनहीनता की दीवारों से टकराकर दम तोड़ देती है।







